Hindi Poem from Avyakt murli. Murli se ek Kavita 19 July 1972. To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page.
19.07.1972 की अव्यक्त मुरली पर आधारित कविता*
*संगठन का महत्व और संगठन द्वारा सर्टीफिकेट*
✺ मोती, मणका , माला में गूथने पर, *बहुमूल्य हो जाता••••*
✺ संगठन मे मिल कर चलने वाले, *हीरेतुल्य बन जाता••••*
✺ एक और एक ग्यारह बनाते,*दो नही••••*
✺ संगठन मे बल है, शक्ति है, *प्रपंच नहीं ••••*
✺ ईशवरीय सेवा मे, यूनिवर्सिटी का सर्टीफिकेट तो,*लेना चाहिए •••*
✺ सम्पर्क ,सम्बन्ध मधुर, स्नेहिल हृद,पुरुषार्थ भी *तीव्र चाहिये••••*
✺ स्वयं, सर्व से,वा,सर्व, स्वयं से,सेवा स्थान *पर हो -संतुष्ट••••*
✺ टीचर की समझानी,वा हैण्डलिग से *कभी ना रूष्ट••••*
✺ पहले बाबा ब्राह्मणों की माला बनाते थे,*उत्साह वर्धन के लिए••••*
✺ पुरुषार्थ की बलिहारी है, विजय पताका *लहराने के लिए•••*
✺ पुरुषार्थ मे गैलप होता, प्राइज के *तिलक से••••*
✺ संस्कार मिलन की रास,दिखे संगठन की झलक से••••*
✺ हर आत्मा विशेष तो है ही, *सर्वस्व त्यागी बनने के बाद••••*
✺ जो औरो की सेवा के निमित्त बने,ड्रामानुसार *समर्पण होने के बाद••••*
✺ मुझ निरगुन हारे मे कोई गुण नहीं,भक्ति में *बहुत गाते थे ••••*
✺ विशेषता ग्यान से ही प्राप्त हुई, बस अब यही *दोहाराते है ••••*
✺ दृष्टि, वृत्ति, ऐसी नेचुरल गुणग्राही हो,*कमजोरी ना दिखाई दे••••*
✺ निवारण मे इतना बल हो, कि कारण *फाउंडेशनलैस सुनाइ दे••••*
✺ अपकारी पर उपकार करो,टाइम *ना करो वेस्ट••••*
✺ और मान,शान, महिमा का कच्चा फल खाने में, *ना करो हेस्ट••••*
✺ देह में होते, निराकारी, वाचा निरहंकारी, *कर्म हो निर्विकारी••••
✺ रागार्ड दे रिगार्ड लो तो आपका *रिकार्ड हो हितकारी ••••*
✺ जैसे सर्जन पहले इंजेक्शन दे,*सुध,बुध,हर लेते••••*
✺ फिर आपरेशन सक्सेसफुल करलेते••••*
✺ चूहे काटने से पूर्व *फूंक सी झरर देते ••••*
✺ आप भी पहले "येस्स" से रिगार्ड देते फिर *उमंग से रंगभरते••••*
✺ शुभकामना ,शुभ भाव से युक्ति युक्त *बोल के पुण्य प्रपात से••••*
✺ संगठन मे चलो,नेकी,प्रेम, रहम भाव से *ना कि अलगाव से••••*
✺ हम सभी, एक बाप के,एक परिवार के, *एक माला के मणके••••*
✺ विघ्नों से नहीं डरेगे, माया के हर वार का सामाना करेंगे, *शांति से बढके•••*
ओमशानति
