Hindi Poem from Avyakt murli. Murli se ek Kavita 22 July 1972. To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page.
*22-07-1972 की अव्यक्त मुरली पर आधारित कविता*
*नष्टोमोहा बनने की भिन्नभिन्न युक्तिया*
✺ पहले अलौकिक जन्म ,का श्रेष्ठ संकल्प, *स्मृति स्वरूप बनाता है••••*
✺ मनुष्यात्मा जो चाहे कर सकती है ,यही पशुयोनि *से अंतर हो जाता है ••••*
✺ आप श्रेष्ठ शक्ति सवरूप आतमाऐ, *नोलेजफुल,पूजनीय हो••••*
✺ बाप के समीप समपर्क मे डायरेक्ट पालना लेनेवाले *उच्च कुलनीय हो••••*
✺ साधारण आत्माऐ प्रवृति की पावर से जो *चाहे कर सकती••••*
✺ तो फिर आप तो, ईशवरीय पावर से विशेषता को *प्रक्टिकल बना सकती ••••*
✺ मास्टर सर्वशक्तिमान के बोल, *रमणिकता और अलौकिकता दर्शाते ••••*
✺ अपने नोलेज रूपी दर्पण से ,*स्वभाव से देहभान भगाते••••*
✺ व्यर्थ को स्वमान से,समर्थ में *परिवर्तित करो••••*
✺ सर्व प्राप्ति समपन्न, *नषटोमोहा स्मृतिलब्धा बनो••••*
✺ हद की जिम्मेवारिया,*बेहद से कम है••••*
✺ फर्ज को "मोह का मर्ज़ " बनाना तो, *माया का दमखम है••••*
✺ 5मुख्य स्मृति से,इमर्ज करने से,मोह का मर्ज़, *मर्ज हो जाएगा••••*
✺ 5मुखी ब्रह्मा समान, विश्व कल्याणकारी के स्वमानधारी हो जाएगे••••*
✺ बालक,गोडली स्टूडेंट, रूहानीयात्री,योद्धा, *खुदाई खिदमतगार••••*
✺ अमृतवेले से ही इन रूपो का स्वरूप बनो, तो बाबा भी है, *मददगार ••••*
✺ उठते ही बालक बन,बाप की *गोद में समा जाओ••••*
✺ सेकण्ड में विस्मृति से स्मृति सवरूप बन अतीन्द्रिय *सुख में रम जाओ••••*
✺ मुरली सुनते, गोडली स्टूडेंट बन,तीनो लोक और चारो युगों के रूहानी यात्री बनो••••*
✺ विकारों रूपी माया को परास्त करो,*रूहानी योद्धा बनो••••*
✺ प्रभू अवतरण का संदेश ,*जन जन तक करो विस्तार••••*
✺ खुदाई खिदमतगार वह है,मानवता जिसका युगो युगो तक करे आभार ••••*
✺ जब सब संग तोड़, एक संग जोङेगे, तभी *नषटोमोहा स्मृति लब्धा बन जाएंगे ••••*
✺ जब पहला वायदा निभाऐगे,तभी पहले नम्बर के *पूज्य और राज्य अधिकारी बन पाएंगे••••*
ओमशान्ति
